"सकीना" मक़सद -ए -ज़िंदगी (तीसरी क़िस्त )
वक़्त जैसा भी हो, बदलता ज़रूर है। बेहद मुफ़लिसी में पली , कम तालीमयाफ़्ता, यतीम सकीना निकाह के बाद उस दुनिया में थी जिसके बारे में उसने कभी ख़्व...
स्कूल के ट्रस्ट्री सुभान साहब ने सकीना को एक मेल भेजा ,मेल पढ़ कर सकीना यक -ब -यक पत्थर सी हो गयी ,उसने आँखें बंद कर लीं, गुज़िश्ता याद...
GIVING TO THE NEEDY HAS BLESSES THE GIVER MORE THAN THE RECEIVER.
ज़रूरतमंदों को देने से , लेने वाले से ज़्यादा देने वाल...
तल्ख़ कर दी है ज़िंदगी जिस ने
कितनी मीठी ज़बान है प्यारे
जंग छिड़ जाए हम अगर कह दें
ये हमारी ज़बान ह...
बौद्ध दर्शन के अनुसार हर समस्या अपने साथ हल भी लेकर आती है है जो कि समस्या के अंदर ही छिपा रहता है। समस्या का समाधान इस बात पर निर्भर करता ...
दुख के जंगल में फिरते हैं कब से मारे मारे लोग
जो होता है सह लेते हैं कैसे हैं बेचारे लोग<...