रिश्ते
रिश्तों की नींव हमारे माँ-बाप बचपन में ही रख देते हैं, बड़े होकर वे सिर्फ़ आकार लेते हैं।" लेखिका शशि महाजन की कहानी 'रिश्ते' माता-पिता के पालन-पोष...
रिश्तों की नींव हमारे माँ-बाप बचपन में ही रख देते हैं, बड़े होकर वे सिर्फ़ आकार लेते हैं।" लेखिका शशि महाजन की कहानी 'रिश्ते' माता-पिता के पालन-पोष...
इस एपिसोड में आप सुनेंगे:
कैसे एक 'मिस जबलपुर' रही खूबसूरत लड़की की जिंदगी चारदीवारी में सिमट गई।
रईस परिवारों के पीछे छिपी कड़वी सच्चा...
भागती-दौड़ती ज़िंदगी, काम का तनाव और बिखरते रिश्ते। मनीषा और सिद्धांत की कहानी आज के हज़ारों जोड़ों की कहानी है। जहाँ समस्या शारीरिक दिखती है, पर ...
सैट (SAT) की परीक्षा देने के बाद, कर्ण अपने पुश्तैनी गाँव आता है जहाँ उसकी मुलाक़ात अपने दादाजी से होती है। दादाजी, जो कभी विश्वविद्यालय में भौतिक...
बीस साल का लंबा इंतज़ार, सात समंदर पार की नौकरियां और अमेरिकन स्कूल के सपने—जब हकीकत बने, तो साथ रहने का सुकून कहीं...
“सफ़र” दो बचपन की सहेलियों की भावुक मुलाकात की कहानी है, जो वर्षों बाद एक ट्रेन यात्रा में अचानक मिलती हैं। यादों, रिश्तों, बदलते समय और जिंदगी के ...
क्या कोई इंसान वाकई 'झल्ला' होता है, या हम उसकी सादगी और त्याग को समझ नहीं पाते?
आज के एपिसोड में हम सुनेंगे शशि महाजन की मर्मस्पर...
एक बेटा, जो अपने सौतेले पिता को 'अंकल' कहने में भी कतराता था, कैसे उन्हीं को अपनी सबसे बड़ी ताकत मान बैठा? यह कहानी है एक ऐसे लड़के की, जो माँ के ...
एक ऐसी जगह जहाँ मन की हज़ारों अनकही बातें आवाज़ पाती हैं। अपनी ज़िंदगी की किताब के पन्नों को पलटते हुए, आइए बात करें उस तपिश की जो हमारे भीतर है, और उ...
वह शहर का लड़का
क्या हम जी रहे हैं या बस एक मशीन का पुर्जा बनकर रह गए हैं? शशि महाजन की यह कविता 'वह शहर का लड़क...