Kahani Raavan Ki
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जिसकी भुजाओं ने स्वयं कैलाश उठाया है, तीनों लोकों का प्रत्येक प्राणी भी, जिसके बाहुबल से थर्राया है, उस जैसा तेजस्वी और ताकतवर योद्धा, संसार में न दूजा है, अपने शीशों को जिसने काट काट, महाकाल को पूजा है। यह कहानी है भक्ति, आस्था, छल और अहंकार की.. यह है “कहानी रावण की” Created by Bhopuwala.

Episode 10 – उद्धार

इस संसार में जो भी घटित होता है, उसका अंत होना निश्चित है। कोई भी प्राणी, समय में वापिस जा कर अपनी भूल को सुधार नहीं सकता, किन्तु वर्तमान में एक नए...

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Episode 9 – पश्चाताप

एक प्राणी अपने जीवन में सबसे बड़ी भूल तब करता है, जब वो अपनी की हुई भूल को स्वीकार नहीं करता। और समय इतना बलवान होता है कि वो आप की भूल का आभास, आप ...

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Episode 8 – विजयी भव

इस संसार में धनुष से निकला बाण और वाणी से निकले शब्द, कभी लौट कर वापिस नहीं आते। और कभी कभी “विजयी भव” का आशीर्वाद भी, स्वयं के विनाश का मुख्य कारण...

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Episode 7 - प्रिय विभीषण

मनुष्य के जीवन में उसकी हार का कारण उसके शत्रु कदापि नहीं होते, अपितु हार तो तब होती है जब आप के अपने ही, आप की पीठ में धोके से वार करते हैं।

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Episode 6 – हरण

इस मतलबी और निर्दयी संसार में आप का आदर और सम्मान तब तक नहीं होगा, जब तक आप इनके आगे अपना शीश झुकाए खड़े रहेंगे, इसीलिए युगों युगों से अपनी प्रशंसा ...

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Episode 5 – स्वयंवर

जीवन में किसी भी प्राणी को अपने तन, धन और भाग्य पर कभी अभिमान नहीं करना चाहिए। अहंकार की सबसे अच्छी और सबसे बुरी बात यह है कि यह कभी आप को इस बात क...

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Episode 4 – अवतार

शक्तियां कभी किसी एक की सदा के लिए नहीं हुई, पृथ्वी पर जब भी किसी बड़ी आपत्ति का आगमन हुआ है, तब तब मानव और जीव कल्याण हेतु, भगवान स्वर्ग से धरती पर...

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Episode 3 – प्रतिशोध

इस संसार में कोई भी इस कारण से पराजित नहीं होता, के जीत उसके भाग्य में नहीं होती, 

अपितु वो तो इस कारणवश पराजित होता है, क्यूँकि जीवन के प्र...

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Episode 2 – आरंभ

प्रत्येक अंत एक नयी कहानी का आरंभ है और प्रत्येक आरंभ के पीछे एक कारण अवश्य होता है, 

मेरा अंत, मेरे जीवन का केवल एक छोटा सा हिस्सा मात्र है...

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Episode 1 - दहन

मैंने जो किया और मुझ संग जो भी हुआ, उसके पीछे के कारणों को जाने बिना कैसे मुझे तुम खलनायक घोषित कर सकते हो, मैं नायक हूँ या खलनायक, 

इसका नि...

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