बौंण - प्राकृतिक खेती की बात
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नमस्कार!

"बौंण" - यह सिर्फ एक शब्द नहीं है, यह उत्तराखंड की उस परंपरा का प्रतीक है, जहाँ बीज (बौंण) को सबसे कीमती धरोहर की तरह संजोया जाता है। यह पॉडकास्ट उसी परंपरा को समर्पित है - प्राकृतिक खेती के बीजों (ज्ञान) को बोने और उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजने का प्रयास।

हम आपका स्वागत करते हैं "बौंण - प्राकृतिक खेती की बात" में, जो पूरी तरह से उत्तराखंड की धरती, यहाँ की माटी, यहाँ के किसान और यहाँ की प्राकृतिक खेती को समर्पित है।

इस पॉडकास्ट में हम बात करेंगे:

  • उत्तराखंड के अनमोल बौंण (बीज): मंडुवा, झंगोरा, गहत, चौलाई, राजमा और स्थानीय धान की देशी किस्मों को पहचानना, उन्हें बचाना और उनकी खेती करना।
  • ️ पहाड़ की परंपरागत खेती: बारानाजा पद्धति, ढाईया, गोबर-मूत्र आधारित खाद, और वो तरीके जो हमारे बुजुर्ग सदियों से इस्तेमाल करते आ रहे हैं।
  • जड़ी-बूटियों की खेती: उत्तराखंड की वादियों में पाए जाने वाले तेजपत्ता, तिमुर, कुटकी, ग्वीठी जैसे औषधीय पौधों की प्राकृतिक खेती और उनका महत्व।
  • देशी गाय और प्राकृतिक खेती: उत्तराखंड की स्थानीय गायों की नस्लों (जैसे पहाड़ी गाय) का संरक्षण और प्राकृतिक खेती में उनकी अहम भूमिका।
  • पानी और जंगल का प्रबंधन: पहाड़ों में पानी के स्रोतों (धारों, गधेरों) को कैसे बचाएं? जंगल और खेती का आपसी रिश्ता।
  • ‍ किसानों की कहानियाँ: उन प्रेरणादायक किसानों से रूबरू होना, जिन्होंने नौकरी छोड़कर या परंपरा को अपनाकर प्राकृतिक खेती में मुकाम हासिल किया।
  • बाजार और बिक्री: स्थानीय उत्पादों (मंडुवे के लड्डू, झंगोरे की खीर) को प्रोसेस करके अच्छा दाम पाने के टिप्स और सरकारी योजनाओं की जानकारी।
  • ️ विशेषज्ञों से बातचीत: कृषि वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान और प्राकृतिक खेती के जानकार आपके सवालों के जवाब देंगे।

हमारा उद्देश्य है कि उत्तराखंड का हर किसान आत्मनिर्भर बने, उसकी जमीन उपजाऊ रहे, और हम सब मिलकर प्राकृतिक खेती को फिर से बसाने का बीज (बौंण) बोएं।

अगर आप भी उत्तराखंड के इस पवित्र प्रयास से जुड़ना चाहते हैं, प्राकृतिक खेती सीखना चाहते हैं, या बस पहाड़ों की इस आवाज़ को सुनना चाहते हैं, तो अभी हमारे चैनल को सब्सक्राइब/फॉलो करें।

अपनी बात, अपने सुझाव और अपनी खेती की कहानियाँ हमें जरूर भेजें। आपकी हर बात इस "प्राकृतिक खेती की बात" को आगे बढ़ाएगी।

"बौंण बचाएं - पहाड़ बचाएं"

"प्राकृतिक खेती अपनाएं - खुशहाल जीवन पाएं"

धन्यवाद!

प्राकृतिक खेती- परिचय

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