विज्ञान के अमर तपस्वी डॉ. जगदीश चन्द्र बसु

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विज्ञान के अमर तपस्वी डॉ. जगदीश चन्द्र बसु

Music


ज्ञान की लौ जली, नभ तक उजियारा हुआ,

भारत का नाम फिर जग में सितारा हुआ।

पत्तों ने गाया—"हममें भी जीवन बसता है",

बसु ने बताया—हर कण में विज्ञान हँसता है।


ओ जगदीश... ओ जगदीश... विज्ञान के उजियारे,

तेरी खोजों से रोशन हैं, धरती-अम्बर सारे।

ओ जगदीश... ओ जगदीश... भारत के रखवाले,

तेरे सपनों से जगमग हैं, ज्ञान के हर उजाले।

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तीस नवम्बर अट्ठारह सौ अट्ठावन,

मयमनसिंह में आया स्वर्णिम सावन।

भगवान चन्द्र ने सत्य सिखाया,

बामासुन्दरी ने प्रेम लुटाया।


मिट्टी से सीखा जीवन का सार,

नदियों से पाया संघर्ष अपार।

हर प्रश्न बना उनके मन का गीत,

ज्ञान बना जीवन का संगीत।


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बंगाली पाठशाला से आरम्भ हुआ,

पाबना में सपनों का दीप जला।

ढाका, कलकत्ता, ज्ञान की राह,

सेंट ज़ेवियर्स ने दी नई चाह।


कैम्ब्रिज पहुँचे लेकर अरमान,

विज्ञान बना जीवन की पहचान।

लंदन से लौटे स्वदेश पुकार,

भारत को देना था नया उपहार।


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चलो बढ़ें उसी डगर, जहाँ ज्ञान का हो मान,

सत्य, सेवा और विज्ञान—यही भारत की शान।


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प्रेसिडेंसी कॉलेज में दीप जलाए,

अन्याय सहकर भी कदम बढ़ाए।

अदृश्य तरंगों का रहस्य बताया,

दुनिया ने भारत का लोहा माना।


बिन तार संदेश हवा में उड़े,

ज्ञान के सूरज नभ में चढ़े।

हर प्रयोग बना नई पहचान,

विश्व ने गाया भारत का गान।

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दुनिया बोली—"पेड़ तो मौन हैं सारे",

बसु बोले—"इनमें भी हैं एहसास हमारे।"


धूप हो, वर्षा हो, शीत की मार,

हर पत्ती सुनती जीवन का सार।


क्रेस्कोग्राफ ने सत्य सुनाया,

हर अंकुर का स्पंदन दिखलाया।

पत्तों की साँसें, जड़ों की तान,

प्रकृति भी गाती जीवन-गान।

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शोध बने अमर ज्ञान के दीप,

पुस्तकों में जग पाया संगीत।

Living and Non-Living का संदेश,

प्रकृति का अनोखा पावन परिवेश।Plant Response ने सत्य बताया,

हर पौधे का मन समझाया।

Comparative Electro-Physiology का प्रकाश,

विश्व ने माना उनका विश्वास।


एक-एक ग्रंथ बना नई उड़ान,

भारत का बढ़ता गया सम्मान।

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बोस इंस्टीट्यूट ज्ञान का मंदिर,

शोध बना भारत का उज्ज्वल समुंदर।


सम्मानों से बढ़ा अभिमान,

विश्व ने माना उनका विज्ञान।


रॉयल सोसायटी का गौरव मिला,

भारत का मस्तक ऊँचा हुआ।

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आज भी हर प्रयोगशाला गाती,

बसु की अमर कहानी सुनाती।


हर विद्यार्थी मन में ठाने,

ज्ञान से भारत आगे जाने।

VikkIndiaEvents University गाए ×2 

ज्ञान के दीप सदा जलाए।

बसु के आदर्शों को अपनाकर,

नवभारत का भविष्य सजाए।


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तेईस नवम्बर उन्नीस सौ सैंतीस,

गिरिडीह रोया खोकर अपना मीत।


तन भले धरती में सो गया,

ज्ञान अमर होकर जग में बो गया।


जब-जब तीस नवम्बर आए,

हम विज्ञान के दीप जलाएँ।


जिज्ञासा को जीवन बनाएँ,

सत्य की राह सदा अपनाएँ।


पौधे हों, नभ हो, सागर की पुकार,हर कण में बसता विज्ञान अपार।

भारत माँ के अमर सपूत को शत-शत प्रणाम,

डॉ. जगदीश चन्द्र बसु—युग-युग अमर रहे तेरा नाम।


ज्ञान की लौ कभी न बुझ पाए,

भारत का सूरज जग में छाए।

बसु का संदेश रहे हर द्वार—

"विज्ञान ही मानवता का सच्चा श्रृंगार।"