Society & Culture
भागती-दौड़ती ज़िंदगी, काम का तनाव और बिखरते रिश्ते। मनीषा और सिद्धांत की कहानी आज के हज़ारों जोड़ों की कहानी है। जहाँ समस्या शारीरिक दिखती है, पर उसकी जड़ें मन और बदलती जीवनशैली में होती हैं। नकुल और मनीषा की बातचीत के ज़रिए जानिए, क्यों आज की पीढ़ी के लिए 'प्राकृतिक' होना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। शशि महाजन की लेखनी से सजी एक मार्मिक और विचारोत्तेजक कहानी।

