Religion & Spirituality
कृष्णवाणी के इस विशेष एपिसोड में श्रीमद्भगवद्गीता के दो प्रमुख मार्गों—
सांख्य योग और कर्मयोग—के बीच के गहरे और सूक्ष्म अंतर्संबंधों की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की गई है।
यह चर्चा स्पष्ट करती है कि जहाँ सांख्य योग आत्मज्ञान, विवेक और सत्य की खोज का मार्ग दिखाता है, वहीं कर्मयोग मनुष्य को बिना फल की चिंता किए अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा देता है। भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार, केवल ज्ञान प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है; उस ज्ञान को जीवन में उतारने के लिए निष्काम कर्म आवश्यक है।
इस एपिसोड में यह भी समझाया गया है कि कैसे
अद्वैत ज्ञान और द्वैत कर्म का संतुलन
मनुष्य को मानसिक द्वंद्व, भ्रम और आसक्ति से मुक्त करता है तथा उसे शांति और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।
यह प्रसंग उन सभी श्रोताओं के लिए मार्गदर्शक है जो सांसारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए भी आध्यात्मिक मुक्ति का पथ खोजना चाहते हैं।
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