"सकीना" मक़सद -ए -ज़िंदगी (तीसरी क़िस्त )

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वक़्त जैसा भी हो, बदलता ज़रूर है। बेहद मुफ़लिसी में पली , कम तालीमयाफ़्ता, यतीम सकीना निकाह के बाद उस दुनिया में थी जिसके बारे में उसने कभी ख़्वाब में भी नहीं सोचा था। आलीशान हवेली के इकलौते वारिस से निकाह कर जहाँ बेशुमार दौलत और ऐश-ओ-आराम मयस्सर था, वहीं अशरफ़ का रवैया कुछ खिंचा-खिंचा सा था। वक़्त ने क्या करवट बदली ? सकीना और अशरफ़ के ताल्लुक़ात कितनी हसीन हक़ीक़त में बदले........