रिश्ते

Share:

KUCH BAATEIN

Society & Culture


रिश्तों की नींव हमारे माँ-बाप बचपन में ही रख देते हैं, बड़े होकर वे सिर्फ़ आकार लेते हैं।" लेखिका शशि महाजन की कहानी 'रिश्ते' माता-पिता के पालन-पोषण के उस पहलू को सामने लाती है, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। बिंदु और सिंधु की खटास और फिर पिता की परिपक्वता से उपजी क्षमा की भावना—यह कहानी हर उस व्यक्ति के दिल को छुएगी जिसने कभी न कभी अपनों के बीच खुद को कमतर महसूस किया है। 'कुछ बातें' के इस एपिसोड में सुनिए रिश्तों के संतुलन, सहानुभूति और पुरानी कड़ियों को तोड़कर आगे बढ़ने की एक मर्मस्पर्शी दास्तान।