Society & Culture
जब ज़िंदगी की पटरी पर उम्मीदें अपना दम तोड़ देती हैं और वक़्त का पहिया बेबस होकर रुक जाता है, तब वह अंधेरे को चीरती हुई एक सु़र्ख़ रोशनी की तरह नुमायाँ होता है। उसका वजूद लोहे जैसी मज़बूती और आग जैसी तपिश से बना है, जिसका मकसद मंज़िल पाना नहीं, बल्कि उन मुसाफ़िरों को बचाना है जो बीच रास्ते में हार मान चुके हैं।
Written and Narrated by: Janamejai

