Society & Culture
कैफ़े में चाय और कॉफ़ी तो सिर्फ़ एक बहाना है, असली मज़ा तो उन अनकही बातों में है जो मेज़ के उस पार रह जाती हैं।
अक्सर हम वहाँ कुछ ढूंढने जाते हैं और उससे कहीं ज़्यादा पा लेते हैं—कभी एक खोया हुआ लम्हा, तो कभी ख़ुद का एक नया अक्स।
मैं हूँ जनमेजय, और आज की कहानी उसी ज़ायके के नाम... जो मेन्यू पर नहीं, सीधा दिल पर लिखा होता है।
Written and narrated by: Janamejai

