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राम राधे श्याम जप लीजिए, नाम बिना कुछ सार नहीं।
खाटू में श्याम, द्वारका में नाथ,
विठ्ठल पंढरपुर, बद्री में विष्णु विशाल सही॥
सुमिरन कीजे राम नाम को, और नहीं जग कोई काम को।
जो इच्छा चाहे है मन पूरन,
सूरदास भजो राधे श्याम को॥
बाँके बिहारी कुंज गलिन में,
मुरली बोले प्रेम रस को।
नाम जपें तो मिटे अंधेरा,
हरि कृपा बरसे पल-पल को॥
राम राधे श्याम जप लीजिए…
राम नाम जप लीजिए, भव सागर से तरे।
सूरदास की विनती सुना,
गोविंद गोकुल धरे॥
द्वारका धीश जगत के पालन,
धर्म की ज्योति जलाएँ।
नाम बिना सब सूना लागे,
हरि ही नैया पार लगाएँ॥
राधे रानी श्याम सुंदर, बंसी बजावत नाचे।
ब्रज की गलियाँ, यमुना तट,
प्रेम सुधा बरसाते॥
खाटू श्याम करुणा सागर,
हारे का सहारा नाम।
जो शरण आए चरण तुम्हारे,
कट जाए सब भव जंजाल॥
विठ्ठल विठ्ठल, पांडुरंगा,
भक्त पुंडलिक रखवाला।
बदरीनाथ के चरणों में,
नारायण जय गोपाला॥
ॐ विष्णवे नमः, ॐ माधवाय नमः।
ॐ केशवाय नमः, ॐ गोविंदाय नमः॥
ॐ नारायणाय नमः, ॐ श्रीधराय नमः।
ॐ वासुदेवाय नमः, ॐ पद्मनाभाय नमः॥
हरि नाम बिनु जीवन व्यर्थ,
सुमिरन करो निरंतर।
मन चंगा तो कठौती में गंगा,
हरि बसे भीतर-अंतर॥
राम राधे श्याम जपि लीजिए,
सूरदास भज मन लागा।
बाँके बिहारी, खाटू श्याम,
द्वारका नाथ, विठ्ठल सागा॥
हरि पद कमल नमस्कार करूँ,
नाम रहे बस श्वास-श्वास।
इह लोक सुधरे, पर लोक उजियारे,
नाम में ही है सारा प्रकाश॥

