प्रकृति के तीन गुण--सत्त्व, रजस और तमस

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कृष्णवाणी: गीता के 18 योग

Religion & Spirituality


कृष्णवाणी पॉडकास्ट के इस विशेष एपिसोड में श्रीमद्भगवद्गीता के सार के माध्यम से प्रकृति के तीन गुणों—सत्त्व, रजस और तमस— की गहन व्याख्या प्रस्तुत की गई है। भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि ये तीनों गुण मानव स्वभाव, विचार और कर्मों को प्रभावित करते हैं। जहाँ सत्त्व गुण पवित्रता, ज्ञान और शांति का प्रतीक है, वहीं रजस गुण इच्छाओं, क्रियाशीलता और आसक्ति को जन्म देता है, और तमस गुण अज्ञान, आलस्य तथा भ्रम का कारण बनता है।

इस एपिसोड में अर्जुन की दुविधाओं के संदर्भ में यह स्पष्ट किया गया है कि मनुष्य को अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं होना चाहिए। बल्कि ज्ञान के साथ निष्काम कर्म करते हुए अपने प्रत्येक कार्य को ईश्वर को समर्पित कर देना ही कर्मबंधन से मुक्ति का मार्ग है। जब व्यक्ति अहंकार का त्याग कर स्वयं को ईश्वर की योजना का एक माध्यम मानता है, तब वह मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त करता है।

यह चर्चा विशेष रूप से उन श्रोताओं के लिए उपयोगी है जो:

सत्त्व, रजस और तमस के प्रभाव को समझना चाहते हैं

गीता के कर्म सिद्धांत को जीवन में उतारना चाहते हैं

तनावपूर्ण जीवन में आंतरिक शांति और संतुलन की खोज में हैं

मोक्ष और आत्मिक उन्नति के मार्ग को जानना चाहते हैं

कृष्णवाणी के साथ यह श्रवण-यात्रा आपको सिखाएगी कि

अहंकार का त्याग, निष्काम कर्म और भक्ति का संतुलन ही

वास्तविक शांति और आध्यात्मिक सफलता का श्रेष्ठ मार्ग है।