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मेरी पहली दुआ तू, मेरी पहली आवाज़,
तेरी धड़कनों में ही छुपा मेरा हर राज़।
जब दुनिया ने ठुकराया, तूने सीने से लगाया,
तेरे आँचल के सुकून ने, हर दर्द मेरा मिटाया।
तेरी गोद में है जन्नत, ये अब जाना मैंने,
खुद को खोकर भी तूने, सब कुछ पाया मैंने।
माँ… तू जन्नत से उतरी हुई एक रौशनी,
तेरे आँचल में सोकर मिलती है ज़िंदगी।
माँ… तू गंगा की अविरल पावन धार,
जिसने धो डाले मेरे हर जन्मों के विकार।
भूखी रहकर भी तूने, मुझे अमृत पिलाया,
अपने हिस्से की खुशियाँ, मेरे नाम लिखाया।
तेरे हाथों की रोटी में, दुआओं का असर,
एक निवाला भी बन जाए, तो टूट जाए हर डर।
रात की ख़ामोशी में, जब डर से मैं रोया,
तेरी लोरी ने माँ, मुझे फिर से संजोया।
माँ… तेरे आँचल का वो सुकून,
जिसमें थम जाए हर तूफ़ान, हर जुनून।
माँ… तेरे क़दमों में ही है भगवान,
तेरे बिना अधूरा हर धर्म, हर पहचान।
तेरे माथे की हर रेखा, मेरी गलती की गवाही,
तेरी आँखों का हर आँसू, मेरी चुप सी सज़ा ही।
फिर भी लबों पर शिकवा, कभी आया ही नहीं,
इतना सच्चा प्रेम, कहीं पाया ही नहीं।
मैं गिरा सौ बार माँ, तू हर बार खड़ी रही,
मेरे हर अंधेरे में, तू ही सुबह बनी रही।
अगर मंदिर है कोई, तो तेरा साया है माँ,
अगर सच्ची इबादत, तो तेरी माया है माँ।
तेरे नाम से शुरू हो, मेरी हर एक दुआ,
तेरे बिना इस जहाँ में, कुछ भी नहीं है मेरा।
खुद को जला कर तूने, मेरा घर रौशन किया,
मेरे हर सपने को तूने, अपने खून से सींचा।
मैं शब्दों में लिख दूँ, इतना काबिल कहाँ हूँ,
माँ… मैं तेरा कर्ज़ चुकाऊँ, इतना हासिल कहाँ हूँ।
माँ… तू देवी, तू ही वरदान,
तेरे चरणों में बसता मेरा आसमान।
माँ… तेरी गोद ही मेरी जन्नत,
तेरे बिना अधूरी मेरी हर इबादत।
अगर अगला जन्म मिले, तो भी बस यही अरज़ी,
माँ… फिर से तेरा बेटा बनूँ,
बस इतनी सी मर्ज़ी meril

