ख़ाली हाथ

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KUCH BAATEIN

Society & Culture


बीस साल का लंबा इंतज़ार, सात समंदर पार की नौकरियां और अमेरिकन स्कूल के सपने—जब हकीकत बने, तो साथ रहने का सुकून कहीं पीछे छूट गया। अर्चना के जीवन के इस मोड़ पर क्या वह अपनी हार मान लेगी या खाली हाथों में सेवा और नए अर्थों की लकीरें भरेगी? मानवीय संवेदनाओं और आधुनिक जीवन की विसंगतियों को बयां करती एक विशेष कहानी।"