कर्म योग के दार्शनिक और व्यावहारिक सिद्धांत

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कृष्णवाणी: गीता के 18 योग

Religion & Spirituality


कृष्णवाणी पॉडकास्ट के इस विशेष एपिसोड में हम श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित कर्म योग के दार्शनिक और व्यावहारिक सिद्धांतों को गहराई से समझते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि इस संसार में निष्काम कर्म ही आत्मिक शांति, मानसिक संतुलन और मोक्ष का वास्तविक मार्ग है।

यह एपिसोड बताता है कि मनुष्य कर्म किए बिना रह ही नहीं सकता, परंतु कर्म के फल की आसक्ति ही उसे बंधन में बाँधती है। श्रीकृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि जब व्यक्ति फल की चिंता छोड़कर केवल कर्तव्य-बोध से कर्म करता है, तब वही कर्म साधना बन जाता है।

इस चर्चा में कर्म योग की तुलना ज्ञान योग और भक्ति योग से करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि कर्म योग गृहस्थ जीवन के लिए सबसे अधिक व्यावहारिक और सुलभ मार्ग है। परिवार, समाज और कार्यक्षेत्र में रहते हुए भी कैसे आध्यात्मिक उन्नति संभव है — इसका स्पष्ट मार्गदर्शन इस एपिसोड में मिलता है।

यह एपिसोड विशेष रूप से उन श्रोताओं के लिए है जो:

• जीवन के तनाव और द्वंद्व से मुक्त होना चाहते हैं

• गीता के ज्ञान को दैनिक जीवन में अपनाना चाहते हैं

• कर्म, अनासक्ति और समर्पण का सही अर्थ समझना चाहते हैं

कृष्णवाणी के साथ यह श्रवण-यात्रा आपको सिखाएगी कि

अनासक्ति और समर्पण के साथ किया गया प्रत्येक कर्म ही मनुष्य को बंधनों से मुक्त कर परमात्मा की ओर ले जाता है।