ज्ञान, कर्म और भक्ति का रहस्य

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कृष्णवाणी: गीता के 18 योग

Religion & Spirituality


कृष्णवाणी पॉडकास्ट के इस विशेष एपिसोड में श्रीमद्भगवद्गीता के आधार पर ज्ञान, कर्म और भक्ति के गहरे अंतर्संबंधों की व्याख्या प्रस्तुत की गई है। प्रथम दृष्टि में ये तीनों मार्ग अलग प्रतीत होते हैं, किंतु भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश स्पष्ट करते हैं कि ये सभी मनुष्य को एक ही लक्ष्य—आत्मज्ञान और मोक्ष—की ओर ले जाते हैं।

इस चर्चा में समझाया गया है कि:

  • ज्ञान योग सत्य की पहचान और आत्मस्वरूप के बोध का मार्ग है।
  • कर्म योग स्वार्थ रहित कर्तव्य पालन की साधना है।
  • भक्ति योग ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और अटूट विश्वास का पथ है।

एपिसोड यह भी स्पष्ट करता है कि जब व्यक्ति अपने प्रत्येक कार्य को यज्ञ भावना से प्रभु को अर्पित करता है, तब वह कर्म बंधन का कारण नहीं रहता, बल्कि मुक्ति का साधन बन जाता है। अहंकार का त्याग, निष्काम कर्म और ईश्वर में विश्वास—ये तीनों मिलकर मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन प्रदान करते हैं।

यह प्रसंग विशेष रूप से उन श्रोताओं के लिए उपयोगी है जो

आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच

आध्यात्मिक स्पष्टता, आंतरिक शांति

और जीवन के उद्देश्य की खोज में हैं।

कृष्णवाणी के साथ यह श्रवण-यात्रा आपको सिखाएगी कि

ज्ञान, कर्म और भक्ति का समन्वय ही

जीवन को पूर्णता और मुक्ति की ओर ले जाता है।