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रणजी ट्रॉफी – भारत के क्रिकेट का गौरवगान
(मुखड़ा)
जब बल्ले ने इतिहास लिखा,
हर दिल में नया विश्वास लिखा।
भारत की क्रिकेट गाथा का,
स्वर्णिम एक अध्याय लिखा।
(अंतरा 1)
कुमार श्री रणजीतसिंहजी, नाम था जिनका महान,
भारत के थे राजकुमार, क्रिकेट था उनकी पहचान।
भारत की टेस्ट टीम तब तक दुनिया में आई न थी,
इस कारण इंग्लैंड की ओर से खेली उन्होंने शान।
लेग-ग्लांस की अद्भुत कला से, जग ने उनका मान किया,
क्रिकेट के इतिहास में उनका नाम अमर सम्मान हुआ।
(सहगान)
रणजी... रणजी... अमर रहे यह नाम,
हर बल्लेबाज़ के दिल में जलता प्रेरणा का धाम।
हर चौके में, हर छक्के में, गूँजे उनकी शान,
भारत की क्रिकेट धड़कन है, रणजी का सम्मान।
(अंतरा 2)
सन् उन्नीस सौ चौंतीस में एक सपना आकार लिया,
एंथनी डी मेलो ने मिलकर भारत को उपहार दिया।
राष्ट्रीय प्रथम श्रेणी क्रिकेट का जब आरंभ हुआ,
पंद्रह टीमों ने मिलकर फिर इतिहास का द्वार लिया।
चार नवंबर उन्नीस सौ चौंतीस, वह दिन यादगार बना,
मद्रास और मैसूर के संग पहला मुकाबला सजा।
चेपॉक की उस पावन धरती पर क्रिकेट का दीप जला,
भारत के खेल इतिहास में स्वर्णिम एक अध्याय बना।
(अंतरा 3)
पहले इसका नाम था केवल "क्रिकेट चैम्पियनशिप ऑफ इंडिया",
फिर आया एक नया सवेरा, बदली इसकी गौरव गाथा।
पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह ने भेंट दिया वह मान,
रणजीतसिंहजी की स्मृति में समर्पित हुआ यह सम्मान।
सन् उन्नीस सौ पैंतीस–छत्तीस से जग ने इसे पहचाना,
"रणजी ट्रॉफी" नाम अमर होकर भारत का गौरव माना।
(ब्रिज)
यहीं से निकले कितने सितारे, जग ने जिनको शीश नवाया,
सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ ने मान बढ़ाया।
विराट कोहली जैसे वीरों ने भी यहीं से उड़ान भरी,
भारत की क्रिकेट यात्रा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
(समापन)
याद रहे यह सत्य सदा, इतिहास कभी न भूलेंगे,
यह ट्रॉफी महाराजा रणजीत सिंह के नाम पर नहीं कहलाएगी।
इसका नाम कुमार श्री रणजीतसिंहजी के सम्मान में रखा गया,
जो नवानगर के शासक और विश्वविख्यात क्रिकेटर थे।
(अंतिम मुखड़ा)
रणजी की यह अमर कहानी, हर पीढ़ी को राह दिखाए,
मेहनत, सम्मान और खेलभावना का संदेश सदा सुनाए।
जब भी भारत क्रिकेट गाए, गूँजे एक ही स्वर,
रणजी ट्रॉफी अमर रहे, भारत का यह अमूल्य सफर।

