घिरि आई बदरिया सावन की | कजरी लोकगीत | Vandana Pandey
Society & Culture
घिरि आई बदरिया सावन की” एक मौलिक भोजपुरी कजरी लोकगीत है, जिसमें सावन ऋतु, मेघ, विरह, प्रेम और पिया की प्रतीक्षा का भाव व्यक्त होता है। यह गीत उत्तर भारत की कजरी परंपरा की आत्मा से प्रेरित है और वंदना पाण्डेय की आवाज़ में Vandana LokSwar के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया है।

