Episode 5 - कभी-कभी सोचता हूँ

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Misra

Episode 5 - कभी-कभी सोचता हूँ

Arts


कभी-कभी सोचता हूँ, कि उन दो बाहों के सिवा, जिनमे एक ख़्वाब, एक उम्मीद, थोड़ा सा जिस्म, थोड़ी सी नींद, एक भरोसा, और एक दिल समा जाए उससे ज़्यादा क़ीमती और नायाब क्या हो सकता है।