Tu Meri Nhi! Hindi Poetry by Gaurav Pandey
Society & Culture
Check out my latest episode 'Tu Meri Nhi!'
Written & Performed by Gaurav Pandey © 2017
तू सूरज तो है,
पर ढलती नहीं।
मैं चाँद तो हूँ,
पर तुझसे कभी चमकता नहीं।
तू दरिया तो है,
पर बहती नहीं।
मैं सीप तो हूँ,
पर मैं मोती नहीं।
तू वक्त सी है,
कभी थमती नहीं,
तू हाथों में तो है,
पर लकीरों में नहीं।
कैसा रिश्ता है मेरा
तुझसे कोई ?
कुछ अनोखा तो है,
पर अंजाना सा है।
तू मुझमें तो है,
पर मैं तुझमें नहीं।
मैं तेरा तो हूँ,
पर तू मेरी नहीं।
Written & Performed by Gaurav Pandey © 2017
तू सूरज तो है,
पर ढलती नहीं।
मैं चाँद तो हूँ,
पर तुझसे कभी चमकता नहीं।
तू दरिया तो है,
पर बहती नहीं।
मैं सीप तो हूँ,
पर मैं मोती नहीं।
तू वक्त सी है,
कभी थमती नहीं,
तू हाथों में तो है,
पर लकीरों में नहीं।
कैसा रिश्ता है मेरा
तुझसे कोई ?
कुछ अनोखा तो है,
पर अंजाना सा है।
तू मुझमें तो है,
पर मैं तुझमें नहीं।
मैं तेरा तो हूँ,
पर तू मेरी नहीं।

