Class 10, Path- Bade Bhai Sahab
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बड़े भाई साहब पाठ के लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं।31 जुलाई 1880 को बनारस वेफ करीब लमही गाँव में जन्मे धनपत राय ने उर्दू में नवाब राय और हिंदी में प्रेमचंद नाम से लेखन कार्य किया। निजी व्यवहार और पत्राचार धनपत राय नाम से ही करते रहे।‘बड़े भाई साहब’ कहानी माध्यम से लेखक, पाठकों को बताना चाहते हैं कि अगर हमसे उम्र्र व अनुभव में बड़े व्यक्ति हमें डाँटते या समझाते हैं, तो छोटों को उनकी बात का बुरा न मानकर, उससे कुछ सीख लेकर उस काम को अच्छे ढंग से करना चाहिए, ताकि असफलता का मुँह न देखना पड़े।लेखक द्वारा कही गयी लाइन भी हमें ये समझा देती है कि शायद उन उपदेशों कारण ही वह दनादन पास हो जाता हैं क्योंकि लेखक का मन पढ़ाई में नही लगता था, पर अपने भाई उपदेशों कारण ही वह पढ़ने को बाध्य होता था और उसी बाध्यता ने उसे पढ़ने को र्मीाबूर किया और वह पास होता गया। प्रस्तुत पाठ में भी एक बड़े भाई साहब हैं, जो हैं तो छोटे ही, लेकिन घर में उनसे छोटा एक भाई और है।उससे उम्र में केवल कुछ साल बड़ा होने के कारण उनसे बड़ी-बड़ी अपेक्षाएँ की जाती हैं। बड़ा होने वेफ नाते वह खुद भी यही चाहते और कोशिश करते हैं कि वह जो वुफछ भी करें वह छोटे भाई के लिए एक मिसाल का काम करे। इस आदर्श स्थिति को बनाए रखने के कारण बड़े भाई साहब का बचपना तिरोहित हो जाता है।

