Society & Culture
15 साल की रश्मि अचानक हँसना-गाना छोड़कर अपने कमरे के अँधेरे में खोने लगती है। बात-बात पर गुस्सा, रोना और पढ़ाई में पिछड़ना—क्या यह सिर्फ़ टीनएज 'आइडेंटिटी क्राइसिस' है या स्कूल की किसी घटना का गहरा ज़ख्म?
जानिए कैसे विद्या और रमेश ने किसी थेरेपिस्ट के बजाय अपने प्यार, धैर्य और संवाद से अपनी बेटी का खोया आत्मविश्वास लौटाया। शशि महाजन की लिखी एक दिल को छू लेने वाली संवेदनशील कहानी—'अध्यापिका'।

